पूर्व राज्य सभा सदस्य डा.अशोक सिद्वार्थ किए गए बसपा से निष्कासित

पूर्व राज्य सभा सदस्य डा.अशोक सिद्वार्थ किए गए बसपा से निष्कासित
-उनके गृहक्षेत्रवासियों ने हैरानी व्यक्त कर कहा कि आखिर क्यों हुआ निष्कासन अशोक तो मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर होने के नाते निकटतम् संबंधी हैं
– स्वास्थ्य विभाग की नौकरी से त्यागपत्र दे, आए थे बसपा पार्टी की राजनीति में
रिपोर्टर – जयपालसिंह यादव
कायमगंज /फर्रुखाबाद
डा. अशोक सिद्वार्थ के बसपा से अगल किए जाने पर उनके गृह क्षेत्र कायमगंज में लोग अचंभित हो हैरानी जातते हुए कह रहे हैं कि आखिर ऐशी कौन सी बात हुई जो बसपा से पूर्व राज्य सभा सदस्य डा० अशोक सिद्धार्थ को बाहर कर दिया गया । लोगों का कहना है कि अशोक की बेटी की शादी मायावती के राजनैतिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले उनके भतीजे आकास आनंद से हुई है । इस नाते वे बसपा सुप्रीमो के निकटतम् रिश्तेदार हैं ।
बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद के ससुर व पूर्व राज्य सभा सदस्य डा. अशोक सिद्वार्थ के पार्टी के निष्कासित होने के बाद उनके गृह क्षेत्र कायमगंज में चर्चाओं का बाजार गरम हो गया है। एकाएक पार्टी नेतृत्व के फैसले से सभी भौंचक्के हैं। राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाए आम है कि आखिरकार दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद यह चौकाने वाला फैसला कैसे आया । आखिर बात क्या है । हर समय बसपा के लिए समर्पित रहने वाले मूल रूप से कायमगंज के मोहल्ला पटवनगली निवासी डा. अशोक सिद्वार्थ बसपा के जानेमाने चेहरा रहे है। 26 मार्च 2023 को जब बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद से डा. अशोक सिद्वार्थ की पुत्री डा. प्रज्ञा की शादी हुई तो बसपा के और बड़े कद्दावर नेताओं में वे पहचाने जाने लगे । इस शादी में स्वयं बसपा सुप्रीमो भी शामिल रही थीं। बसपा से निष्कासन पर उनके गृह क्षेत्र में फैसले से लोग असंतुष्ट नजर आ रहे है। हैरानी जताते हुए राजनैतिक दलों के लोग विभिन्न माध्यमों से संपर्क कर निष्कासन का असली कारण जानने का प्रयास कर रहे हैं ।
इनसेट : –
बसपा सुप्रीमो के निर्देश पर सरकारी सेवा से त्यागपत्र दे आये थे सक्रिय राजनीति में
कायमगंज : –
डा. अशोक सिद्वार्थ आर्थोमैट्री डिप्लोमा कर स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हुए थे । बसपा शासन काल में उन्हें पिछड़ा वर्ग आयोग का सदस्य तथा उनकी पत्नी सुनीता सिद्धार्थ को राज्य महिला आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया था । शुरू से ही अशोक बामसेफ की विचार धारा से जुडकर सक्रिय रहे । उनका राजनैतिक कद उस समय सामने आया जब बसपा ने उन्हें विधान परिषद सदस्य के रूप में प्रस्तावित कर पहली बार बर्ष 2009 में एमएलसी बनाया । इसके बाद और महत्व दे पार्टी द्वारा डा० अशोक सिद्धार्थ को बर्ष2016 में राज्य सभा सदस्य के रूप में सांसद बनाया। इस पद पर वे वर्ष2022 तक रहे । इसके अलावा पार्टी की जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए वे कानपुर, आगरा जोनल कोआर्डीनेटर के बाद पार्टी के राष्ट्रीय सचिव पद पर भी रहे। इतना ही नहीं श्री सिद्धार्थ को केरल – कर्नाटक – एवं तमिलनाडू सहित करीब पांच प्रांतों का पार्टी प्रभारी का दायित्व भी सौपा गया था । निष्कासन तक पार्टी के राष्ट्रीय सचिव की भूमिका में रहते हुए अशोक दक्षिण भारत में 5 राज्यों के प्रभारी का कार्यभार भी ग्रहण किए थे । कि इसी बीच पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया ।

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