भास्कर न्यूज़ –
संवाददाता बरेली –
इस साम्राज्यवादी हमले का विरोध करते हुए, भाकपा माले ने भारत सरकार से चार सूत्रीय मांगें कीं। इनमें ईरान पर इजरायल और अमेरिकी साम्राज्यवादी हमले के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित कर युद्ध रुकवाने की कूटनीतिक कोशिशें शामिल है। साथ ही, इजरायल और युद्धग्रस्त खाड़ी के देशों में फंसे भारतीय मजदूरों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने की सख्त कार्यवाही की गारंटी की मांग की गई।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने रायबरेली जिलाधिकारी कार्यालय पर इजरायल-अमेरिकी गठजोड़ द्वारा ईरान पर थोपे गए युद्ध के विरुद्ध प्रदर्शन किया। पार्टी ने इस संबंध में राष्ट्रपति को चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन भी भेजा।माले कार्यकर्ताओं ने अमेरिकी साम्राज्यवाद विरोधी नारे लगाए और हमले की निंदा की। माले नेता विजय विद्रोही ने कहा कि अमेरिकी साम्राज्यवादी हमला रिहायशी बस्तियों, स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बना रहा है। हाल ही में पीने के पानी के ठिकानों पर हमला कर अमानवीय कृत्य किया गया है।
उन्होंने हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी पोत ‘इरिस देना’ पर हमले का भी जिक्र किया। यह हमला भारत से नौसैनिक मिलन समारोह से लौटते समय किया गया, जिसे सीमाओं का घोर अतिक्रमण बताया गया। विद्रोही ने भारत सरकार की इजरायल-अमेरिकी युद्ध में ‘प्रतिक्रिया विहीन’ स्थिति को अप्रत्यक्ष रूप से साम्राज्यवादी अमेरिका की कार्यवाही का समर्थन बताया।
कामरेड विद्रोही ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विगत वर्षों में हजारों भारतीय निर्माण श्रमिक और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को इजरायल भेजा गया था, जिनकी जान खतरे में है। इजरायल ने अमेरिकी नागरिकों को भी सुरक्षा देने या बाहर निकालने में असमर्थता जताई है, जिससे भारतीय कामगार और नागरिक भारी संकट में हैं।
इस कार्यक्रम में मजदूर नेता राम गोपाल लोधी, खेग्रामस जिलाध्यक्ष राम चंद वर्मा, राही माले सचिव हरी लाल सहित दर्जनों कार्यकर्ता शामिल हुए।