चीता-तेंदुआ के अंगों की तस्करी में 6 दोषिओं को सजा मिली

भास्कर न्यूज़

संवाददाता लखनऊ –

सीबीआई की जांच में सामने आए एक बड़े वन्यजीव तस्करी मामले में लखनऊ की CBI कोर्ट ने छह आरोपियों को दोषी करार दिया है। चीता और तेंदुए के अंगों की अवैध तस्करी से जुड़े इस मामले में अदालत ने सभी दोषियों को दो-दो साल की सजा और जुर्माने से दंडित किया है, जिससे वन्यजीव अपराध के खिलाफ सख्त संदेश गया है।

लखनऊ सीबीआई  कोर्ट ने मुमताज अहमद, जैबुन निशा, अजीज उल्लाह, वहीद, सरताज और मजीद को दोषी करार दिया। अदालत ने सभी छह आरोपियों को दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। सके बाद विस्तृत जांच करते हुए 15 जुलाई 2000 को लखनऊ की अदालत में शिकायत दाखिल की गई। करीब दो दशक लंबे ट्रायल और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया।

मामले की जांच के दौरान सीबीआई  ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित वन्यजीव के अंग बरामद किए थे। बरामद सामग्री में 18,000 तेंदुए के नाखून, 74 तेंदुए की खाल, 4 बाघ की खाल और बाघ-तेंदुए की हड्डियां शामिल थीं।कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर यह माना कि आरोपी न केवल प्रतिबंधित वन्यजीव सामग्री के कब्जे में थे, बल्कि उसके अवैध व्यापार में भी सक्रिय रूप से शामिल थे। अदालत ने उन्हें वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 की धारा 49B और 51 के साथ-साथ IPC की धारा 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया।सजा सुनाई गई

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