भास्कर न्यूज़ एजेंसी
फर्रुखाबाद –
बाढ़ राहत कंट्रोल रूम की खुली पोल! कई बार फोन करने पर भी नहीं मिला जवाब, मौके पर भी नहीं मिले जिम्मेदार
गंगा का जलस्तर बढ़ने से सहमे ग्रामीण, लेकिन राहत व्यवस्था पर सवाल; कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली कटघरे में
अमृतपुर
गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर से तहसील अमृतपुर के कई गांव बाढ़ के खतरे का सामना कर रहे हैं। प्रशासन लगातार राहत और बचाव की तैयारियों के दावे कर रहा है, लेकिन सोमवार को बाढ़ राहत कंट्रोल रूम की स्थिति ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए।
जानकारी के अनुसार, बाढ़ राहत कंट्रोल रूम के नंबर पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं किया गया। इसके बाद जब मौके पर पहुंचकर व्यवस्था का जायजा लिया गया, तो कंट्रोल रूम में अपेक्षित ड्यूटी व्यवस्था नजर नहीं आई। इससे यह चिंता बढ़ गई कि यदि किसी बाढ़ पीड़ित को तत्काल सहायता की आवश्यकता हो, तो उसे समय पर मदद कैसे मिलेगी।
बाढ़ राहत कंट्रोल रूम का उद्देश्य आपदा की घड़ी में लोगों की शिकायतें सुनना, सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान करना और राहत एवं बचाव कार्यों का समन्वय करना है। लेकिन फोन का जवाब न मिलना और मौके पर व्यवस्था को लेकर उठे सवाल आपदा प्रबंधन की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और कई गांवों में पानी पहुंचने लगा है। ऐसे समय में कंट्रोल रूम की निष्क्रियता लोगों की चिंता बढ़ा रही है। उनका कहना है कि आपदा के समय कंट्रोल रूम केवल नाम का नहीं, बल्कि पूरी तरह सक्रिय होना चाहिए।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने, ड्यूटी व्यवस्था की समीक्षा करने और यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि बाढ़ राहत कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे प्रभावी ढंग से संचालित हो, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को तत्काल सहायता मिल सके।