भास्कर न्यूज़ एजेंसी
फर्रुखाबाद –
कंपिल नगरी मे शिवभक्तो ने शिवालयो मे जलाभिषेक किया।
ओम शक्ति
कम्पिल, फर्रुखाबाद। सावन मास के प्रथम सोमवार पर चारों युगों की धार्मिक विरासत को संजोए प्राचीन तीर्थ नगरी कम्पिल पूरी तरह शिवभक्ति में सराबोर नजर आई। “छोटी काशी” के नाम से प्रसिद्ध इस ऐतिहासिक नगरी के श्री रामेश्वरनाथ, श्री कालेश्वरनाथ, भूतेश्वरनाथ, गंगेश्वरनाथ, बरखंडी नाथ, कपिल मुनि आश्रम और हनुमानगढ़ी सहित सभी प्रमुख शिवालयों में तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। फर्रुखाबाद के अलावा बदायूं, एटा, कासगंज, मैनपुरी और आसपास के जनपदों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने कांवड़ में गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक किया।
मंदिर परिसर पूरे दिन “हर-हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने गंगाजल, बेलपत्र, दूध, दही, शहद, धतूरा और पंचामृत अर्पित कर विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।
गंगा तट पर बसी कम्पिल नगरी का धार्मिक महत्व चारों युगों से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित श्री रामेश्वरनाथ मंदिर, द्वापर युग में माता द्रौपदी द्वारा स्थापित श्री कालेश्वरनाथ मंदिर तथा कलियुग में स्थापित गीता ज्ञान आश्रम का 11 खंडीय श्री राधा-कृष्ण मंदिर इस नगरी की आध्यात्मिक पहचान हैं। इसी कारण कम्पिल को “छोटी काशी” के नाम से भी जाना जाता है।
महंत श्री श्री 1008 आनंद गिरी महाराज के शिष्य महाराज सुशील ठाकुर ने बताया कि श्री रामेश्वरनाथ मंदिर में स्थापित त्र्यम्बक शिवलिंग की पूजा प्राचीन काल में कुबेर और रावण द्वारा किए जाने की मान्यता है। वहीं महंत सत्यगिरि एवं भगवान दास महाराज के अनुसार श्री कालेश्वरनाथ मंदिर का संबंध महाभारत काल से है और इसकी स्थापना माता द्रौपदी द्वारा किए जाने की लोकमान्यता है।
सावन मास के दौरान दोनों प्रमुख मंदिरों सहित नगर के सभी शिवालयों में रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन, शिव महिमा का गुणगान और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समितियां दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में जुटी हैं। पूरे दिन शिवभक्तों की आस्था, भक्ति और उत्साह से तीर्थ नगरी कम्पिल का वातावरण पूरी तरह शिवमय बना रहा।