भास्कर न्यूज़ –
अलीगढ़ संवाददाता –
इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध की तपिश अब अलीगढ़ के जायके तक पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते कॉमर्शियल गैस सिलेंडरो की सप्लाई में आई भारी कमी
शहर के करीब 500 से अधिक छोटे-बड़े प्रतिष्ठानों ने अपने यहां तंदूर, कड़ाही औरअब दाल पकाने, ग्रेवी उबालने और स्टॉक बनाने जैसे बुनियादी काम भी प्रभावित हो रहे हैं। गैस न होने के कारण भारी मात्रा में सब्जियां और मीट जैसे कच्चे उत्पाद खराब हो रहे हैं, ग्रिल से बनने वाले व्यंजनों को बनाना बंद कर दिया है। संचालकों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो उन्हें अपने होटल और रेस्टोरेंट पूरी तरह बंद करनी पड़ सकती हैं।जबकि संचालकों को स्टाफ की सैलरी, बिजली बिल और दुकान का किराया अपनी जेब से भरना पड़ रहा है।
अलीगढ़ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के महामंत्री विवेक बगई ने इस संकट को उद्योग की रीढ़ पर हमला करना बताया है। उन्होंने कहा कि गैस की कमी का असर केवल खाने के स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे व्यापार का ऑपरेशनल चक्र बिगड़ गया है।
इस किल्लत के बीच शहर में गैस की कालाबाजारी की शिकायतों ने भी जोर पकड़ लिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष मानव महाजन और सेंटर पॉइंट व्यापार मंडल के प्रतिनिधिमंडल ने अपर जिलाधिकारी नगर किंशुक श्रीवास्तव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है।
कारोबारियों का आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्व इस संकट का फायदा उठाकर कृत्रिम कमी पैदा कर रहे हैं ताकि गैस सिलेंडरो को ऊंचे दामों पर बेचा जा सके। उन्होंने मांग की है कि गैस एजेंसियों के स्टॉक रजिस्टर की जांच की जाए और वितरण व्यवस्था प्रशासन की सीधी निगरानी में हो।
प्रशासन ने इस मामले में जांच टीमें गठित कर दी हैं। एडीएम सिटी किंशुक श्रीवास्तव ने सभी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ बैठक कर खाद्य एवं रसद विभाग को छापेमारी के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई भी एजेंसी या बिचौलिया कालाबाजारी में लिप्त पाया गया तो उसका लाइसेंस तुरंत रद्द कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है और नए वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल 2026 से एक परिवार को साल में 15 सिलेंडर मिल सकेंगे, जिसमें दो बुकिंग के बीच 25 दिन का अंतर अनिवार्य होगा।
