October 7, 2026
Bhaskar News Agency
उत्तर प्रदेश

मानवतावादी संत पुरुष थे संत रविदास

मानवतावादी संत पुरुष थे संत रविदास
रिपोर्टर – जयपालसिंह यादव
कायमगंज / फर्रुखाबाद
अपने दौर में सामाजिक क्रांति के अगुआ रहे संत रविदास की जयंती पर विश्व बंधु परिषद द्वारा कृष्णा प्रेस परिसर में आयोजित संगोष्ठी में संस्था अध्यक्ष प्रोफे. रामबाबू मिश्र रत्नेश ने कहा कि संत रविदास न तो तुलसी की तरह समझौता वादी थे और न कबीर की तरह और आक्रामक, बल्कि वे तो गुरु नानक देव की तरह मानवतावादी धर्म पुरुष थे । अपने विचार व्यक्त कर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुनील चक ने कहा कि संत रविदास ने पाखंड और आडंबर का खंडन किया और मन की पवित्रता पर जोर दिया। वैदिक धर्म समाज की संत परंपरा में उनका बहुत ऊंचा स्थान है। प्रधानाचार्य शिवकांत शुक्ला -पूर्व प्रधानाचार्य अहिबरन सिंह गौर एवं प्रोफे. कुलदीप आर्य ने संयुक्त रूप से कहा कि भारत में सामाजिक समरसता न तो कानून और न राजनीति से बल्कि संतों के माध्यम से ही संभव है। रामसिंह गौतम एडवोकेट, रामगोपाल सिंह ,वीएस तिवारी, जेपी दुबे आदि ने कहा कि तथागत बुद्ध ने करुणा का जो संदेश दिया था । संत रविदास ने इसका व्यावहारिक रूप प्रस्तुत किया। प्रख्यात गीतकार पवन बाथम ने मीरा के गुरुदेव को प्रणाम करते हुए सार युक्त संदेश दे कहा कि…
जो कुछ तुलसी कह गए जो बोले रविदास।
सिर्फ उसी से संभव समरस सहज प्रकाश।।
विरले ही इस जगत में होते हैं रविदास।
जिनको अपनी भक्ति पर होता है विश्वास।।
युवा कवि अनुपम मिश्रा ने कहा कि
कर जो तेरा कार्य है इसमें कैसी शर्म।
कर्म योग ही भक्ति है कर्म योग ही धर्म।।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूजन और संत रविदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। वक्ताओं ने कहा कि संत रविदास जी का जीवन सादगी कर्मयोग मानवतावादी दृष्टिकोण का ऐशा अनुपम संगम है जो आज भी व्यवहारिक एवं प्रेरणा दायी है ।

Related posts

, भाजपा से सटोगे तो हो जाओगे बर्बाद’ सपा विधायक बोले- हमारी लड़ाई बेरोजगारी, और महंगाई

admin

हमारे देश का संविधान सिर्फ एक किताब नहीं जो अलमारी में बंद रहे—कनिष्का सिंह

admin

दबंगों ने किसान को पीटकर छीना ट्रैक्टर, विरोध करने पर लाठी-डंडों से किया हमला

admin

Leave a Comment