भास्कर न्यूज़ एजेंसी
गांधी जयंती पर पत्रकार संगठन आई जे यू द्वारा देशव्यापी ‘मांग दिवस’ मनाया गया
लखनऊ 2 अक्टूबर
इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन (IJU), देशभर के कार्यरत पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख संगठन की घोषणा .के अनुसार 2 अक्टूबर 2026, गांधी जयंती के अवसर पर देशभर में ‘मांग दिवस’ मनाया गया
देशव्यापी ‘मांग दिवस पर ज्ञापन के माध्यम से मीडिया कर्मियों के समक्ष मौजूद महत्वपूर्ण संरचनात्मक एवं वैधानिक समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई
यूनियन की समस्त राज्य इकाइयों ने अपनी जिला स्तर तक के इकाइयों से ज्ञापन दिलाया गया ज्ञापन में
नए मीडिया आयोग का गठन
अंतिम प्रेस आयोग ने चार दशक से भी अधिक समय पहले, 1982 में, अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसके बाद प्रसारण टेलीविजन, ऑनलाइन पोर्टल और एल्गोरिदम आधारित सोशल मीडिया नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है।
IJU का कहना है कि आधुनिक पत्रकारिता में मीडिया स्वामित्व के केंद्रीकरण, नियामक ढांचे, डिजिटल माध्यमों से होने वाली आय तथा पत्रकारिता की नैतिक कार्यप्रणाली जैसे विषयों की व्यापक समीक्षा के लिए नए मीडिया आयोग का तत्काल गठन आवश्यक है।
तथा पत्रकारों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय कानून बनाया जाए
देशभर में पत्रकारों को लगातार विभिन्न व्यावसायिक जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें शारीरिक हिंसा, दुर्भावनापूर्ण मुकदमे और डिजिटल उत्पीड़न प्रमुख हैं।
IJU ने केंद्र सरकार से मांग की है कि पत्रकारों और समाचार संस्थानों की शारीरिक सुरक्षा तथा कानूनी संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष केंद्रीय कानून बनाया जाए, ताकि पत्रकार बिना भय या प्रतिशोध की आशंका के अपने लोकतांत्रिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें।व निरस्त किए गए कार्यरत पत्रकार कानूनों के वैधानिक अधिकार बहाल किए जाएं
कार्यरत पत्रकार एवं अन्य समाचार-पत्र कर्मचारी (सेवा की शर्तें) एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1955 तथा कार्यरत पत्रकार (वेतन दरों का निर्धारण) अधिनियम, 1958 को नए श्रम कानूनों से प्रतिस्थापित किए जाने के कारण न्यूज़रूम में कार्यरत पेशेवरों की मूलभूत नौकरी सुरक्षा, वैधानिक सेवा शर्तों और शिकायत निवारण की व्यवस्थाएं कमजोर हुई हैं।
IJU ने इन पत्रकार-विशेष कानूनों के अंतर्गत उपलब्ध अलग और विशिष्ट कानूनी संरक्षण को पुनः बहाल करने की मांग की है।
साथ ही नए वेतन बोर्ड का गठन किये जाने की मांग की
मजीठिया वेतन बोर्ड का गठन वर्ष 2007 में हुआ था और इसके बाद लगभग दो दशक बीत चुके हैं।
IJU के अनुसार, जहां अन्य क्षेत्रों में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर वेतन में संशोधन किए गए हैं, वहीं पत्रकारों और गैर-पत्रकार मीडिया कर्मचारियों की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है।
IJU ने नए वेतन बोर्ड के तत्काल गठन की मांग की है तथा कहा है कि इसका दायरा प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल—सभी प्रकार के मीडिया प्लेटफॉर्मों तक विस्तारित किया जाना चाहिए।
देशभर में पत्रकार साथियों जोरदार प्रदर्शन के साथ अपने-अपने क्षेत्र में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार तक पहुंचाया
