भास्कर न्यूज़ एजेंसी –
कानपुर संवाददाता –
कानपुर पुलिस चरस-गांजा बेचने वालों की ‘दोस्त’ है। माल कहां से आना है? कहां बिकना है? ये सब पुलिस की शह पर होता है। ये हम नहीं, बल्कि खुद कानपुर पुलिस कमिश्नर की जांच कह रही है। जब छापेमारी से पहले तस्कर गांजा-चरस के अड्डों से हटने लगे, तब कमिश्नर ने पुलिसवालों की कॉल डिटेल चेक कराई।इसकी शुरुआत 7 अक्टूबर, 2025 से हुई, जब कानपुर में पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने कमान संभाली। पुरानी फाइलों को देखते हुए उन्हें पता चला कि कानपुर के कुछ इलाकों में गांजा और चरस की तस्करी बढ़ गई है।
एक दरोगा और 3 हेड कॉन्स्टेबल की सीडआर में तस्करों के नंबर मिले। पुलिस वालों के जब मोबाइल चेक करवाए गए, तो कुछ ऑडियो ऐसे मिले, जिसमें वो तस्करों को माल (गांजा, चरस) हटाने के टिप्स दे रहे थे। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने इन पुलिस वालों की प्रॉपर्टी पर एक इंटरनल जांच बैठाई। इसमें हैरान करने वाले फैक्ट सामने आए।10 जनवरी, 2026 को पुलिस ने 2.50 करोड़ के गांजा के साथ 5 तस्करों को पकड़ा, इनमें साकेतनगर में रहने वाले दीपू और दीपा भी पकड़े गए। आरोपियों के पास से 5.43 लाख रुपए नकद मिले थे। पुलिस कमिश्नर ने घटना का खुलासा करते हुए बताया था कि ये बदमाश छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर शहर में गांजा सप्लाई करते थे।
सचेंडी थाने में तैनात हेड कॉन्स्टेबल जितेंद्र प्रताप सिंह 100 करोड़ की प्रॉपर्टी का मालिक बन चुका था। उसने मंधना के अशोका होटल के पास 600 गज का एक प्लॉट खरीदा। यहीं पर एक 200 गज का मकान भी बनवाया। वह पत्नी-रिश्तेदारों के नाम पर कई बेनामी संपत्तियां भी खरीद चुका है। उसके पास करोड़ों की कीमत का गोल्ड भी मिला।
IPS अफसर सुमित सुधारकर रामटेके को उन्होंने ऑफिस बुलाया और नशे की तस्करी के खिलाफ काम करने के लिए फ्री हैंड दिया। IPS ने तुरंत एक स्पेशल टीम बनाई। वह तस्करों के मूवमेंट का पीछा करने लगे।
जांच में सामने आया कि पुलिस वाले अपने ‘दोस्त तस्करों’ को मैसेज में इमोजी भेजकर अलर्ट करते थे। ताकि वे सर्विलांस से पकड़े न जाएं। फिलहाल 4 पुलिस वालों के खिलाफ डिपार्टमेंटल जांच चल रही है, जिन्हें सस्पेंड किया गया है।
