August 26, 2026
Bhaskar News Agency
उत्तर प्रदेश

ब्रह्मलीन साधु के अंतिम संस्कार व समाधि स्थल पर हुआ विवाद

ब्रह्मलीन साधु के अंतिम संस्कार व समाधि स्थल पर हुआ विवाद
– साधु के अनुयाई मंदिर परिसर में ही समाधि बनाने की बात कह रहे थे जबकि ग्रामीण परिसर से बाहर – प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद तय हुई समाधि स्थल की जगह
भास्कर न्यूज : –
रिपोर्टर जयपाल सिंह यादव
कायमगंज / फर्रुखाबाद
कायमगंज क्षेत्र के गांव भटासा में स्थित ब्रह्मदेव मंदिर पर एक साधु पिछले काफी समय से रह कर पूजा पाठ करते थे । लम्बी बीमारी के बाद साधु का निधन हो गया । साधु की समाधि मंदिर परिसर में ही बनाने की बात सुनते ही ग्रामीणों ने विरोध जताया । मामला बढ़ता देख प्रशासन को करना पड़ा हस्तक्षेप इसके बाद अंत्येष्ठ व समाधि स्थल का बिवाद शांत हुआ । यहां इस मंदिर पर लगभग पिछले 8 साल से 80 वर्षीय बाबा रामेश्वर गिरि महाराज अपने शिष्य सूरज गिरि, रामआसरे गिरि, शिष्या माया गिरि के साथ ब्रह्मदेव मंदिर परिसर में रहते चले आ रहे थे । पिछले काफी दिनों से मंदिर महंत साधु रामेश्वर गिरि का स्वास्थ्य बिगड गया था । शिष्य अपने गुरु का उपचार आगरा से करा रहे थे । शनिवार को वह डाक्टर से स्वास्थ्य परीक्षण के बाद दबा लेकर आगरा से वापस लौट आए । इसी बीच देर रात अचानक हालत बिगडी और साधु ने करीब 11 बजे मंदिर परिसर में ही अंतिम सांस ली। उनके अंतिम संस्कार के लिए उनके शिष्यों द्वारा परिसर में ही उनकी समाधि स्थल की व्यवस्था की जा रही थी। इसी बीच गांव के काफी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मंदिर परिसर में समाधि स्थल बनाने का विरोध किया। ग्रामीणों का कहना था कि यह ग्राम पंचायत की जगह है। यहां वर्षाे से मेला लगता है। मंदिर भी है। ऐसे में बाबा का गंगा घाट पर अंतिम संस्कार किया जाए। इसमें वह लोग भी सहयोग करेंगे। इस बात पर बाबा पक्ष के शिष्य राजी नहीं हुए और कहा उनकी समाधि स्थल यही बनेगी। यही बात साधु / संयासी के नियम में है। तभी कुछ अन्य नागा साधू भी आ गए और कहा कि उनकी समाधि स्थल वही बनेगी जहां उन्होंने अंतिम सांस ली है। विरोध बढ़ता देख मामले की जानकारी तहसील प्रशासन को दी गई। सूचना पर तहसीलदार विक्रम सिंह चाहर, इंस्पेक्टर लाइन आर्डर राजेश सिंह पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। जहां उन्होंने मामला शांत कराया और दोनो पक्षों की बात सुनी। तहसीलदार ने कहा कि विवाद से कुछ नहीं निकलेगा। पहले समाधान की बात की जाए। काफी देर वार्ता के बाद तय हुआ कि बाबा की समाधि मंदिर के पास गांव की तरफ बाली जगह पर बन जायेगी । इस पर विचार के बाद दोनों पक्ष सहमत हो गए ।

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