भास्कर न्यूज़ एजेंसी –
लखनऊ संवाददाता -मानवेंद्र सिंह मूल रूप से जालौन जिले के रहने वाले थे। उनके पिता सुरेंद्र पाल सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस से रिटायर्ड हैं। कई साल पहले मानवेंद्र आशियाना सेक्टर-L में मकान बनवाकर रहने लगे थे। नौ साल पहले पत्नी का निधन हो गया था। तब से वह बेटे अक्षत और बेटी कृति (17) की खुद ही देखभाल करते थे। आरोपी अक्षत बीकॉम का छात्र है।
वारदात आशियाना कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर-L की है। मृतक मानवेंद्र सिंह वर्धमान पैथोलॉजी लैब के मालिक थे। शराब के कारोबार से भी जुड़े थे। डीसीपी विक्रांत वीर ने बताया- बेटे अक्षत ने ही वारदात को अंजाम दिया। शरीर के कई अंग अभी नहीं मिले हैं, जिन्हें आरोपी की निशानदेही पर खोजा जाएगा।
आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसके पिता चाहते थे कि वह NEET क्वालीफाई करके MBBS करे। वह इस बात पर अड़ा था कि MBBS के लिए उस पर जबरदस्ती न की जाए। वह पिता से कहता था कि पैथोलॉजी लैब की जगह लॉन या रेस्टोरेंट खोला जाए, जो ज्यादा अच्छा बिजनेस रहेगा। इसी बात को लेकर 20 फरवरी को पिता से बहस हुई। आरोपी बेटे के मुताबिक, 20 फरवरी को सुबह 4:30 बजे उसने लाइसेंसी राइफल से पिता को गोली मारी। उस वक्त बहन भी मौजूद थी। बहन ने चिल्लाने की कोशिश की तो उसे धमकाया। कहा- अगर तुमने किसी से घटना के बारे में बताया तो जान से मार डालूंगा। इसके बाद उसके घर से बाहर नहीं निकलने दिया पिता की हत्या के बाद अक्षत ने राइफल गद्दे के नीचे छिपा दी थी। पुलिस उसे घर लेकर पहुंची।
21 साल के इकलौते बेटे ने हत्या कर दी। आरोपी ने बहन के सामने पिता को गोली मारी, फिर आरी से शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में भर दिया। सिर को कार में रखकर 21 किलोमीटर दूर फेंक आया। किसी को बताने पर बहन को भी मार देने की धमकी दी। डर की वजह से बहन ने किसी को कुछ नहीं बताया।
पिता का सिर फेंकने के बाद आरोपी घर लौटा और कार की सफाई की। तीन दिन बाद सोमवार को वह थाने पहुंचा और गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने जब पूछताछ शुरू की तो बेटा घबराया नजर आया। शक होने पर सख्ती से पूछताछ की गई, तब उसने जुर्म कबूल कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि शरीर के टुकड़े कर काकोरी इलाके के सदरौना में फेंक दिए हैं।उसकी बातें सुनकर पुलिसकर्मी हैरान रह गए। पुलिस उसे लेकर मौके पर पहुंची और शव के टुकड़े बरामद किए, लेकिन सिर नहीं मिला।
