हापुड़, शिवगढ़ी: नगर के मोहल्ला शिवगढ़ी में स्थित शराब की दुकान को हटाने की मांग को लेकर रविवार सुबह महिलाओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और शराब की दुकान को अविलंब रिहायशी क्षेत्र से हटाने की मांग की। बाद में प्रदर्शनकारियों ने हापुड़ के तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा, जिसमें एक सप्ताह के भीतर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
स्थानीय निवासियों, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों, ने इस दुकान को लेकर नाराजगी जताई। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने बताया कि शराब की दुकान के कारण क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। दुकान के बाहर लोगों की भीड़ इकट्ठा होती है, जिससे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा प्रभावित हो रही है। महिलाओं और बच्चों को वहां से गुजरने में असुरक्षा महसूस होती है।
प्रदर्शन के दौरान निवासियों ने शराब की दुकान से हो रही प्रमुख समस्याओं को सामने रखा:
सार्वजनिक अशांति: शराब पीने वालों की भीड़ के कारण आए दिन क्षेत्र में झगड़े और विवाद होते रहते हैं।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा: नशे में धुत्त लोग महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियाँ करते हैं, जिससे वे असहज महसूस करती हैं।
युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव: रिहायशी क्षेत्र में शराब की उपलब्धता के कारण युवाओं में नशे की लत बढ़ रही है।
पर्यावरण और स्वच्छता की समस्या: दुकान के आसपास शराब की बोतलें और कचरा फैला रहता है, जिससे गंदगी और दुर्गंध का माहौल बन गया है।
शिक्षण संस्थानों पर प्रभाव: शराब की दुकान से महज 300 मीटर की दूरी पर एक स्कूल और स्पोर्ट्स अकादमी स्थित हैं। इस रास्ते से गुजरने वाले छात्र इस माहौल से प्रभावित हो रहे हैं।
तहसीलदार ने दिया एक सप्ताह में कार्रवाई का आश्वासन
विरोध प्रदर्शन के बाद, महिलाओं और स्थानीय निवासियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हापुड़ के तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से शराब की दुकान को हटाने की मांग की गई है। तहसीलदार ने आश्वासन दिया कि प्रशासन इस मामले की गहन समीक्षा करेगा और एक सप्ताह के भीतर उचित कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रशासन पर बढ़ा दबाव
इस प्रदर्शन के बाद स्थानीय प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों का कहना है कि वे जल्द ही इस मामले पर निर्णय लेंगे और रिहायशी क्षेत्र में शराब की दुकान के संचालन की वैधता की जांच करेंगे।
आगे की रणनीति
स्थानीय निवासियों ने कहा कि यदि प्रशासन ने एक सप्ताह के भीतर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे और भी बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।